प्राइवेट शिक्षा देश में एक क्रन्तिकारी कदम
आज का युग निजीकरण का युग है और इस निजीकरण ने हमारी शिक्षा प्रणाली को भी अपने अंतर्गत समेट लिया है ! यह तथ्य सत्य है कि शिक्षा का निजीकरण होने से शिक्षा के क्षेत्र में क्रान्ति आई है !
चलिए अब निजीकरण से हट कर सरकार के द्वारा बनाये गए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा क़ानून की बात करते है !मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह देश के हरेक बच्चे को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराए। लेकिन क्या शिक्षा पाने के लिए बच्चों को सरकारी स्कूल की शरण में जाना जरूरी है? क्या शिक्षा मुहैया कराने में यह बात ज्यादा अहमियत रखती है कि स्कूल सरकारी हैं या निजी? सरकार शिक्षा मुहैया कराने की गारंटी भले ही देती है, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं कि ऐसा सरकारी स्कूल के जरिये ही हो। कई लोग सोचते हैं कि स्कूल का निर्माण, नियंत्रण और संचालन सरकार करे, लेकिन ऐसा सोचना दुखद है। एनुअल स्टेटस ऑफ स्कूल रिपोर्ट 2009 के उनसार सरकारी स्कूलों में कक्षा 5 तक के करीब 52 फीसदी बच्चे तो कक्षा दो के पाठयक्रम को ठीक से समझ नहीं पाते हैं। सरकारी स्कूलों की ऐसी खस्ता हालत को देखते हुए अभिभावक अब अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के बजाय निजी स्कूलों में भेज रहे हैं।
अभिभावकों के निजी स्कलों में अपने बच्चों के भेजने के पीछे तीन वजहें हैं। पहली तो यह कि निजी स्कूल बेहतर शिक्षा मुहैया कराते है, दूसरी सस्ती और तीसरी बात यह कि ये बच्चों और उनके अभिभावकों के प्रति अधिक जवाबदेह होते हैं। ये स्कूल अंग्रेजी माध्यम में बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराते हैं, जिसकी मांग मौजूदा समय में दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। सबसे ऊपर मैने निजीकरण के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति की बात कही थी! ये क्रांति लाने का सबसे ज्यादा श्रेय जाना चाहिए निजी स्कूल को ।
चलिए अब निजीकरण से हट कर सरकार के द्वारा बनाये गए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा क़ानून की बात करते है !मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह देश के हरेक बच्चे को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराए। लेकिन क्या शिक्षा पाने के लिए बच्चों को सरकारी स्कूल की शरण में जाना जरूरी है? क्या शिक्षा मुहैया कराने में यह बात ज्यादा अहमियत रखती है कि स्कूल सरकारी हैं या निजी? सरकार शिक्षा मुहैया कराने की गारंटी भले ही देती है, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं कि ऐसा सरकारी स्कूल के जरिये ही हो। कई लोग सोचते हैं कि स्कूल का निर्माण, नियंत्रण और संचालन सरकार करे, लेकिन ऐसा सोचना दुखद है। एनुअल स्टेटस ऑफ स्कूल रिपोर्ट 2009 के उनसार सरकारी स्कूलों में कक्षा 5 तक के करीब 52 फीसदी बच्चे तो कक्षा दो के पाठयक्रम को ठीक से समझ नहीं पाते हैं। सरकारी स्कूलों की ऐसी खस्ता हालत को देखते हुए अभिभावक अब अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के बजाय निजी स्कूलों में भेज रहे हैं।
अभिभावकों के निजी स्कलों में अपने बच्चों के भेजने के पीछे तीन वजहें हैं। पहली तो यह कि निजी स्कूल बेहतर शिक्षा मुहैया कराते है, दूसरी सस्ती और तीसरी बात यह कि ये बच्चों और उनके अभिभावकों के प्रति अधिक जवाबदेह होते हैं। ये स्कूल अंग्रेजी माध्यम में बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराते हैं, जिसकी मांग मौजूदा समय में दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। सबसे ऊपर मैने निजीकरण के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति की बात कही थी! ये क्रांति लाने का सबसे ज्यादा श्रेय जाना चाहिए निजी स्कूल को ।
सरकार चाहे तो प्रति बच्चे होने वाला खर्च अभिभावक को देकर अपनो बच्चों को क्वालिटी शिक्षा के द्वार खोल सकती है ।
अभिभावक अपने बच्चों को कहा ओर केसी शिक्षा देनी है ये अभिभावक तय करे आने वाला खर्च सरकार वहन करे ।
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