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Showing posts from December, 2016

आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर लेख

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किसी भी राष्ट्र अथवा समाज में शिक्षा सामाजिक नियंत्रण, व्यक्तित्व निर्माण तथा सामाजिक व आर्थिक प्रगति का मापदंड होती है । भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली ब्रिटिश प्रतिरूप पर आधारित है जिसे सन् 1835 ई॰ में लागू किया गया । जिस तीव्र गति से भारत के सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक परिदृश्य में बदलाव आ रहा है उसे देखते हुए यह आवश्यक है कि हम देश की शिक्षा प्रणाली की पृष्ठभूमि, उद्‌देश्य, चुनौतियों तथा संकट पर गहन अवलोकन करें । सन् 1835 ई॰ में जब वर्तमान शिक्षा प्रणाली की नींव रखी गई थी तब लार्ड मैकाले ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि अंग्रेजी शिक्षा का उद्‌देश्य भारत में प्रशासन के लिए बिचौलियों की भूमिका निभाने तथा सरकारी कार्य के लिए भारत के विशिष्ट लोगों को तैयार करना है । इसके फलस्वरूप एक सदी तक अंग्रेजी शिक्षा के प्रयोग में लाने के बाद भी 1935 ई॰ में भारत की साक्षरता दस प्रतिशत के आँकड़े को भी पार नहीं कर पाई । स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत की साक्षरता मात्र 13 प्रतिशत ही थी । इस शिक्षा प्रणाली ने उच्च वर्गों को भारत के शेष समाज में पृथक् रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । ब्रिटिश स...

प्राइवेट शिक्षा देश में एक क्रन्तिकारी कदम

आज का युग निजीकरण का युग है और इस निजीकरण ने हमारी  शिक्षा प्रणाली  को भी अपने अंतर्गत समेट लिया है ! यह तथ्य सत्य है कि शिक्षा का निजीकरण होने से शिक्षा के क्षेत्र में क्रान्ति आई है ! चलिए अब निजीकरण से हट कर सरकार के द्वारा बनाये गए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा क़ानून की बात करते है !मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह देश के हरेक बच्चे को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराए। लेकिन क्या शिक्षा पाने के लिए बच्चों को सरकारी स्कूल की शरण में जाना जरूरी है? क्या शिक्षा मुहैया कराने में यह बात ज्यादा अहमियत रखती है कि स्कूल सरकारी हैं या निजी? सरकार शिक्षा मुहैया कराने की गारंटी भले ही देती है, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं कि ऐसा सरकारी स्कूल के जरिये ही हो। कई लोग सोचते हैं कि स्कूल का निर्माण, नियंत्रण और संचालन सरकार करे, लेकिन ऐसा सोचना दुखद है। एनुअल स्टेटस ऑफ स्कूल रिपोर्ट 2009 के उनसार सरकारी स्कूलों में कक्षा 5 तक के करीब 52 फीसदी बच्चे तो कक्षा दो के पाठयक्रम को ठीक से समझ नहीं पाते हैं। सरकारी स्कूलों की ऐसी खस्ता हालत को...

ऑन लाइन शिक्षा

टेक्नोलॉजी का युग है पेपर की  जगह कम्प्यूटर ले रहा है आने वाले कुछ समय बात बच्चों के बेग में किताबे न होकर लेपटॉप होगा कापिया में लिखने की बजाय कम्प्यूटर में टाइप करना होगा । हाथ से लिखे हुए पन्नों को आने वाले समय में संग्रहालय में रखे जायेंगे जेसे आज ताम्र पत्र संग्रहालयों में मिलते है दुकानो में ख़रीदारी के बजाय ऑनलाइन ख़रीदारी की जायेगी  । बेंको में लाइन के बजाय ऑन लाइन बैंकिंग  हो जायेगी। लेकिन शिक्षा के बावजूद जागरूकता की कमी और अपने आप को न बदल पाने की सोच  के कारन हम ये सब स्वीकार करने से कतराते  है । एटीएम जब आया था या आजा भी लोग एटीएम  का उपयोग  करने से डरते है लेकिन समय के साथ परिवर्तन  करना पड़ेगा । हम किसी बदलाव की स्वीकार करने में बहुत टाइम लगा देते है या बदलाव की एजेंसी पर विशवास नहीं है ।    शिक्षा के फिल्ड में तो बहुत ही बड़ा बदलाव आने वाला है  आज अगर देखते है तो सरकारी भर्ती परीक्षा में लगभग ऑनलाइन परीक्षाये ही आयोजित करवाई जाती है लेकिन परीक्षा सेंटर की कमी के चलते कुछ परीक्षाये ऑफ़लाइन भी करवाई जाती है पर कुछ ही...

हल्दी की सब्जी का सरल तरीका

सर्दियो में हल्दी का सब्जी खाने का हर किसी का मन करता है पर लागत खर्च, बनाने में लगने वाले समय और बनाने की विधि से अनभिग्यता से हल्दी के स्वाद से वंचित रह जाते है । सामग्री -1kg हल...