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राजधानी में स्पा सेंटरों पर नकेल, अब नहीं लगेगी कमरों में कुंडी

राजधानी में स्पा सेंटरों पर नकेल, अब नहीं लगेगी कमरों में कुंडी राजधानी में स्पा-मसाज सेंटरों की आड़ में चल रही संदिग्ध गतिविधियों पर प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए पहली बार संचालन के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं। इन गाइडलाइंस के अनुसार अब स्पा सेंटर के कमरों में दरवाजों पर कुंडी नहीं लगेगी और केवल मैग्नेटिक लॉक का उपयोग होगा, जिससे अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके। स्पा सेंटरों में लंबे समय से अवैध गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं, जिसमें बिना किसी जांच-पड़ताल के संचालन जारी था। प्रशासन ने अब सभी स्पा संचालकों को निर्देश दिया है कि वे अपने सेंटर का पंजीकरण कराएं और कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन कराएं। बाड़मेर में भी हो कार्रवाई की मांग बाड़मेर जिले में भी कई स्पा सेंटर, कैफे और कुछ होटल अनैतिक गतिविधियों के केंद्र बन चुके हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन इन जगहों पर भी निगरानी बढ़ाए और अनियमित रूप से संचालित हो रहे इन व्यवसायों की जांच करे। कई स्पा सेंटर बिना लाइसेंस के चल रहे हैं और वहां कार्यरत कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं किया जाता। इसके अलावा, कैफे में ...

जॉर्ज फर्नांडिस का कुछ ऐसा रहा जीवन का सफर

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जॉर्ज फर्नांडिस का जन्‍म मैंगलोर में एक कैथोलिक परिवार में हुआ था. जॉर्ज, जोसेफ और एलिस के छह बच्‍चों में सबसे बड़े थे. इनकी मां किंग जॉर्ज V की बहुत बड़ी समर्थक थीं, सो उन्‍होंने अपने बेटे का नाम जॉर्ज ही रख दिया. इनके पिता एक फाइनेंस ग्रुप में इंश्‍योरेंस एक्‍जेक्‍यूटिव थे. जॉर्ज को उनके परिवार में प्‍यार से गैरी कहकर भी बुलाते थे. इन्‍होंने मैंगलोर के सेंट अलॉयसिस कॉलेज से SSLC (Secondary School Leaving Certificate) को पूरा किया. इसके बाद परिवार की रूढ़िवादी परंपरा के अनुसार इन्‍हें रोमन कैथोलिक पादरी की ट्रेनिंग लेने के लिए 16 साल की उम्र में बेंगलुरु के St. Peter's Seminary में भेज दिया गया. 19 साल की उम्र में इन्‍होंने सेमिनरी छोड़ दिया. ये काम था ट्रांसपोर्ट, होटल और रेस्‍तरां इंडस्‍ट्री में वर्कर्स के साथ होने वाले शोषण के लिए आवाज उठाना. बता दें कि सिमिनरी को छोड़ने के बाद फर्नांडिस 1949 में काम की तलाश में मुंबई आए. एक अखबार में प्रूफरीडर की नौकरी मिलने तक वह मुंबई की सड़कों पर ही सोकर रात काटते थे. वह खुद कहते थे कि मुंबई में नौकरी न मिलने तक उन्‍होंने चौपटी की रेत पर ...

गहलोत के शपथ ग्रहण समारोह में महफिल लूट ले गईं वसुंधरा राजे सिंधिया...............सिंधिया को यूं लगाया गले

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आज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समेत कई दिग्गज कांग्रेसी नेता पहुंचे। लेकिन सभी टीवी चैनलों पर अगर कोई छाया तो वो हैं पूर्व राजस्‍थान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया। कांग्रेसी दिग्गजों के बीच बार-बार कैमरे वसुंधरा राज सिंधिया को ढूंढ़ ले रहे थे। असल में वसुंधरा राजे शपथ ग्रहण समारोह में बाकी नेताओं से पहले ही पहुंच गईं। इसके बाद उन्होंने कांग्रेसी नेताओं से मुस्कुराकर मुलाकात करनी शुरू की। ऐसा होते देख कांग्रेसी नेता भाव विह्वल हो गए। एक-एक कर सभी कांग्रेसी व विपक्ष के नेता उनसे मिलने आने लगे। इस समारोह के बीच दो परिवारों ने लाड प्यार का एक शानदार फोटो कैमरे में कैद किया गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके भतीजे ज्योतिरादित्य सिंधिया का यह फोटो सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है। दरअसल, शपथ ग्रहण समारोह में समय पर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे स्टेज पर थीं।...

शपथग्रहण में एक छोर से दूसरे छोर खुद चलकर वसुंधरा के पास पहुंचे राहुल

जयपुर:  राजस्थान में अशोक गहलोत ने बतौर मुख्यमंत्री और सचिन पायलट ने उपमुख्यमंत्री के रूप में सोमवार को शपथ ली. जयपुर के अल्बर्ट हॉल में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई आला नेता मौजूद रहे. साथ ही इस समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी शिरकत की. इस मौके पर एक अनूठा दृश्य भी देखने को मिला. दरअसल जैसे ही राज्यपाल कल्याण सिंह ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट को शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण समारोह के अंत में राष्ट्रगान हुआ. उस दौरान राहुल गांधी और मनमोहन सिंह समेत अन्य नेता मंच के बाएं छोर पर खड़े थे. जैसे ही राष्ट्रगान खत्म हुआ सभी नेता एक दूसरे से मिलने लगे और मंच के बीच में खड़े सचिन पायलट को बधाई देने के लिए पहुंचने लगे. इसी दौरान राहुल गांधी मंच के बाईं ओर से चले और मंच के बीच में खड़े सचिन पायलट को दरकिनार कर आगे बढ़ते रहे. वे चलते-चलते मंच के दाहिने छोर पर पहुंच गए. वहां पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे खड़ी थीं. राहुल तुरंत उनके पास पहुंचे. उन्होंने वसुंधरा राजे से हाथ मिलाया. उनसे हाल-चाल पूछा और ...

एसीबी की चौहटन में हुई बड़ी कार्यवाही

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चौहटन डिस्कॉम कर्मचारी को रिश्वत लेते पकड़ा गया विद्युत कनेक्शन की सामग्री के लिए मांगी थी रकम पीड़ित व्यक्ति की शिकायत पर एसीबी ने की कार्यवाही डिस्कॉम कर्मचारी अशोक कुमार को रंगे हाथो किया गिरफ्तार पांच हजार रूपये की रिश्वत लेते रंगे हाथो किया गिरफ्तार प्राथी सताराम जाट खेराज का तला की शिकायत पर हुई कार्यवाही चौहटन में डिस्कॉम कर्मचारी रिश्वतखोरी में रंगे हाथो हुआ गिरफ्तार

किसानों की कर्जमाफी पर अशोक गहलोत ने कहा- हम अपना काम करेंगे...उम्मीद है पीएम मोदी भी सहयोग करेंगे

रविवार को शपथ ग्रहण स्थल अल्बर्ट हॉल का जायजा लेने पहुंचे अशोक गहलोत ने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि भारत सरकार को आगे बढ़कर यह संदेश पूरे देशभर में देना चाहिए कि 'डॉन्ट वरी..चाहे सरकार हमारी नहीं बनी लेकिन हमारी तरफ से सहयोग में कोई कमी नहीं रहेगी. गहलोत ने कहा कि जब वे पिछली बार मुख्यमंत्री थे तब केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी. तब राजस्थान में कोई कमी नहीं थी. जब एक पत्रकार ने पूछा कि पीएम मोदी का आधिकारिक बयान आया है उस पर आप क्या कहेंगे. तब गहलोत ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि प्राइम मिनिस्टर का पहला ट्वीट यह आना चाहिए कि हमारी तरफ से सहयोग में कोई कमी नहीं होगी. अशोक गहलोत चाहते हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी खुद आगे बढ़कर यह मैसेज राजस्थान सरकार को दें कि 'डोंट वरी' केंद्र सरकार उनके साथ है. राजस्थान में भले ही भाजपा की सरकार नहीं बनी हो लेकिन उन्हें यह संदेश देना चाहिए कि वो राजस्थान की मदद वैसे ही करेंगे जैसे वो खुद की सरकार होने पर करते थे.  राजस्थान की जनता भले ही 10 दिनों के भीतर कर्ज माफी की उम्मीद में है और विपक्ष कांग्रेस के इस वादे को पूरा नहीं किए जाने पर...

स्‍वामी विवेकानंद की ये 10 बातें जरूर याद रखें

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1.उठो जागो, रुको नहीं... उठो, जागो और तब तक रुको नहीं जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये। 2.तूफान मचा दो तमाम संसा हिल उठता। क्या करूँ धीरे-धीरे अग्रसर होना पड़ रहा है। तूफ़ान मचा दो तूफ़ान! 3. अनुभव ही शिक्षक जब तक जीना, तब तक सीखना' -- अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है। 4. पवित्रता और दृढ़ता पवित्रता, दृढ़ता तथा उद्यम- ये तीनों गुण मैं एक साथ चाहता हूँ। 5- ज्ञान और अविष्‍कार ज्ञान स्वयं में वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका आविष्कार करता है। 6- मस्तिष्‍क पर अधिकार जब कोई विचार अनन्य रूप से मस्तिष्क पर अधिकार कर लेता है तब वह वास्तविक भौतिक या मानसिक अवस्था में परिवर्तित हो जाता है। 7- आध्‍यात्मिक दृष्टि आध्यात्मिक दृष्टि से विकसित हो चुकने पर धर्मसंघ में बना रहना अवांछनीय है। उससे बाहर निकलकर स्वाधीनता की मुक्त वायु में जीवन व्यतीत करो। 8- नैतिक प्रकृति हमारी नैतिक प्रकृति जितनी उन्नत होती है, उतना ही उच्च हमारा प्रत्यक्ष अनुभव होता है, और उतनी ही हमारी इच्छा शक्ति अधिक बलवती होती है। 9- स्‍तुति करें या निंदा लोग तुम्हारी स्तुति करें या निन्दा, लक्ष्मी तुम्हारे ऊ...