जॉर्ज फर्नांडिस का कुछ ऐसा रहा जीवन का सफर
जॉर्ज फर्नांडिस का जन्म मैंगलोर में एक कैथोलिक परिवार में हुआ था. जॉर्ज, जोसेफ और एलिस के छह बच्चों में सबसे बड़े थे. इनकी मां किंग जॉर्ज V की बहुत बड़ी समर्थक थीं, सो उन्होंने अपने बेटे का नाम जॉर्ज ही रख दिया. इनके पिता एक फाइनेंस ग्रुप में इंश्योरेंस एक्जेक्यूटिव थे. जॉर्ज को उनके परिवार में प्यार से गैरी कहकर भी बुलाते थे. इन्होंने मैंगलोर के सेंट अलॉयसिस कॉलेज से SSLC (Secondary School Leaving Certificate) को पूरा किया. इसके बाद परिवार की रूढ़िवादी परंपरा के अनुसार इन्हें रोमन कैथोलिक पादरी की ट्रेनिंग लेने के लिए 16 साल की उम्र में बेंगलुरु के St. Peter's Seminary में भेज दिया गया. 19 साल की उम्र में इन्होंने सेमिनरी छोड़ दिया. ये काम था ट्रांसपोर्ट, होटल और रेस्तरां इंडस्ट्री में वर्कर्स के साथ होने वाले शोषण के लिए आवाज उठाना. बता दें कि सिमिनरी को छोड़ने के बाद फर्नांडिस 1949 में काम की तलाश में मुंबई आए. एक अखबार में प्रूफरीडर की नौकरी मिलने तक वह मुंबई की सड़कों पर ही सोकर रात काटते थे. वह खुद कहते थे कि मुंबई में नौकरी न मिलने तक उन्होंने चौपटी की रेत पर ...